राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने हिमाचल विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित

शिमला। राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व के स्वर्ण जयंती समारोह के उपलक्ष्य में आज (शुक्रवार) हिमाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश द्वारा पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने की स्वर्ण जयंती से जुड़े विधान सभा के इस विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मैं प्रदेश के लगभग 70 लाख निवासियों को, पूरे देश की ओर से, बधाई देता हूं।


हिमाचल प्रदेश के लोगों ने विगत 50 वर्षों में विकास की जो गाथा लिखी है उस पर सभी देशवासियों को गर्व है। इसके लिए सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने अहम भूमिका निभाई है। हिमाचल प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार “सतत विकास लक्ष्य – इंडिया इंडेक्स 2020-21” में हिमाचल प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है।

इस अवसर पर राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने हिमाचल प्रदेश के दौरे के लिए राष्ट्रपति का अभिन्नदन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि हम हिमाचल प्रदेश के 50 वर्षों के स्वर्णिम वर्षों की यात्रा के इस महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश को राष्ट्रपति का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है, जो राज्य के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र और लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों का मन्दिर है। जनप्रतिनिधि लोगों के विचारों और उनकी आकांक्षाओं को विधानसभा के समक्ष रखते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा को सकारात्मक चर्चा का केन्द्र माना जाता है और विचार-विमर्श के माध्यम से ही सकारात्मक परिणाम हासिल किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की अलग-अलग संस्कृति और रीति-रिवाज हैं और प्रदेश की इस विविधता को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

राज्यपाल आर्लेकर ने राज्य को पूर्ण राज्यत्व का दर्जा हासिल करवाने में अपना योगदान देने वाले प्रदेश के सभी व्यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अलग राज्य के रूप में हिमाचल का सपना संजोने वाले लोगों को प्रदेशवासी नमन करते हैं। उन्होंने प्रदेश के विकास में अहम योगदान देने के लिए यहां के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार के योगदान को भी स्मरण किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने विधानसभा द्वारा प्रकाशित ‘हू इज हू’ पुस्तक का विमोचन भी किया और इसकी एक प्रति राष्ट्रपति को भेंट की।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने भारत के राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए बहुत गौरव की बात है कि इस वर्ष को राज्य के स्वर्णिम जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इस पहाड़ी राज्य की 50 वर्षों की यात्रा गौरवशाली और उपलब्धियों से भरी हुई रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय 651 रुपये थी जो वर्तमान में बढ़कर एक लाख 95 हजार हो गई है। इसी प्रकार वर्ष 1971 में प्रदेश में सड़कों की लम्बाई 7370 किलोमीटर थी जबकि आज यहां 37,808 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का नेटवर्क है। वर्ष 1971 में प्रदेश में केवल 4945 शौक्षणिक संस्थान थे जबकि वर्तमान में इनकी संख्या 15000 से अधिक हो गई है। आज प्रदेश में एम्स, आईआईएम, आईआईआईटी जैसे कई राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट संस्थान हैं। प्रदेश ने इन वर्षों के दौरान कृषि और बागवानी क्षेत्र में आभूतपूर्व विकास किया है।


जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में की गई प्रगति को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है तथा विभिन्न नवोन्मेषी योजनाओं और अभूतपूर्व विकास के लिए राज्य ने कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों में देश के साथ-साथ प्रदेश भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम और गतिशील नेतृत्व में देश ने न केवल इस महामारी पर सफलतापूर्वक विजय हासिल की है, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा टीकाकारण अभियान भी चलाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने कोविड-19 टीकाकरण अभियान में 18 वर्ष से अधिक आबादी के पहली खुराक के शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य को हासिल किया है।